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फ़ॉर्वर्डेड गुड मॉर्निंग

by Dr Shambhu Kumar Singh

फ़ॉर्वर्डेड खुशियां

आज सुबह सुबह जैसे ही व्हाट्सएप खोला बहुत सारे गुड मॉर्निंग, सुप्रभात नजर आए। ये सभी मेरे अपनों के द्वारा भेजे गए थे। पर देख कर दुख हुआ कि अधिकांश गुड मॉर्निंग फ़ॉर्वर्डेड थे। मतलब हम पूरे यांत्रिक हो गए हैं इस गुड मॉर्निंग में भी !? इधर से आया ,उधर खिसकाया। क्या जमाना आया है?
भावनाएं भी अपनी नहीं रही । निजी न हों , उधार की हो तो सच में रोना आता है। हम बिल्कुल रोबोट होते जा रहे हैं। यंत्रवत सुप्रभात या गुड मॉर्निंग फॉरवर्ड कर दे रहे हैं।
एक बार की बात है, हमारे एक मित्र थे। वे आकुल व्याकुल मेरे पास आये और बोले कि एक लव लेटर लिख दो ,तुम अच्छा लिखते हो । तुम लिखो और पटे नहीं यह हो नहीं सकता! मैं तो अकचकया ,यह क्या बात हुई ? प्रेमिका आपकी ,प्रेम आपका ,भावना आपकी इसमें मैं क्या करूँगा? उन्होंने फिर कहा कि नहीं ,लिख तो दो ही , प्रेम में एक ही भावना होती है वो तुम जानते ही हो । बस लिख दो। ना नुकुर करते मैं आखिर लिख ही दिया एक प्रेम पत्र! असर किया । क्योंकि एक सप्ताह बाद मित्र आधा किलो रसगुल्ला ले कर आये और मुझे बहुत बहुत धन्यवाद कहा। बल्कि मेरे हाथ को चूम लिया । बोले इसमें जादू है ,जादू ! बाद में मालूम हुआ कि इस जादू की कॉपी कर मित्र अपने अन्य मित्रों को भी दिए मानो बी ए के गेस पेपर से नोट लिखवा रहे हों ! बहुत दिनों बाद एक आदमी मुझे कहने भी आया कि अगर तुमको कोई लड़की नहीं पट रही हो तो अपने उस मित्र से लिखवा लो ,क्या लिखता है यार ,लड़की ऐसी पटती है कि सीधे ईको पार्क रेल हो जाती है ! मैं तो माथा पिट लिया ,क्या जमाना आया ?
अभी परसों एक बुक स्टॉल पर देखा भी ,एक किताब थी , 101 प्रेम पत्र के नमूनें! किताब देख कर ही मैं घबरा गया । मानो प्रेम नहीं हुआ रेसिपी हो गया। लो ऐसे बनाओ । तो मीठा इतना डालो,थोड़ी नमक इतनी। चटपटा बनेगा। सबसे खतरनाक बात तो यह मित्र ने कर दी कि उसके तीन मित्र मेरे ही पत्र के मजमून को एक ही लड़की को दे आये। जबकि वह लड़की मेरी मित्र थी। अब वह चकित थी और चिंतन में थी कि मैं जो उसे पत्र भेजा था वह मैं किससे लिखवाया था !? तो ऐसी दुश्वारियों से भी रूबरू होना पड़ता है!
फ़ॉर्वर्डेड गुड मॉर्निंग वैसी ही एक मशीनी प्रेम पत्र है जिसका ओरिजिनल प्रेषक कहीं खो जाता है। गुड मॉर्निंग भी मुझे चन्नर बाबा का खाजा लगता है। हुआ कि मेरे गाँव के चन्नर बाबा के बेटे की शादी थी। तो पुछारी में साड़ी ,खाजा, टिकरी आदि आया। चन्नर बाबा उसे अपनी बेटी के यहाँ जस के तस भेज दिए। बेटी भी उसे अपनी फुफ़िया सास को भेज दी। फुफ़िया सास अपनी ननद के यहाँ भेजी। ननद की रिश्तेदारी चन्नर बाबा के यहाँ। एक महीना परिक्रमा करते वह खाजा मिठाई चन्नर बाबा के यहाँ पहुंचा हुआ था। अब खाजा का दौरा जो चन्नर बाबा खोले तो देखे कि खाजा तो पिल्लूओं का ढ़ेर बन चुका है। खाजा के दौरा को छोड़ चन्नर बाबा लाठी ले सनेस लाने वाले नाई को गाँव के सीमान तक दौड़ा दिए। आगे आगे नउआ ,पीछे पीछे चन्नर बाबा। बोल भी रहे थे ,रुक साले ,हमरे खाजा हमहीं को भेज दिया वह भी एक महीना पर ? नउआ बेचारा गिरते पड़ते भागा । कहाँ तो वह विदाई और बख्शीश के चक्कर में दरवाजे पर बैठा था कहाँ यह व्यवहार ? वह भी चकित था कि माजरा क्या है?
तो यह होता है फ़ॉर्वर्डेड गिफ्ट या मिठाई का परिणाम! अब फ़ॉर्वर्डेड गुड मॉर्निंग सड़ता तो नहीं है पर घूम फिर कर फिर उसी के यहाँ पहुंच जाए तो कैसा लगेगा? तो यही निवेदन है मित्रो, गुड मॉर्निंग करो पर इतने भी यंत्रवत मत बनो कि उधार की मिठाई से नेवता पूरते रहो!
सुप्रभात !

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©डॉ. शंभु कुमार सिंह
29 दिसम्बर,20
पटना
www.voiceforchange.in
www.prakritimitra.com
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(आलेख के सभी पात्र काल्पनिक हैं , नाम बदले हुए हैं पर घटना सही है। )

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