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सतुआनी

by Dr Shambhu Kumar Singh

आज सतुआनी है ।
सतुआनी मतलब सतुआ का भोग ! पर्व भी सतुआ का । हमारा पर्व भी अद्भुत है । पुआ,पूड़ी, पकवान वाले पर्व भी हैं तो सतुआ वाले भी ।
पर्व में अद्भुत समन्वयवादी दृष्टिकोण समाहित है ! वैज्ञानिकता भी ! गर्मी की ऋतु है । तो एक पर्व सतुआ से जुड़ा हुआ भी । पर्व मतलब स्वास्थ्य और समृद्धि का उत्सव ! अब गर्मी आ गई है तो क्या क्या खान पान होना चाहिए उसकी पूर्व पीठिका है यह पर्व !
आहार विहार को संयमित करने का अनुष्ठान !
तो ज्यादा नहीं लिखते इतना ही कह रहा हूँ कि हमारे पर्व बेहद ही तार्किक और वैज्ञानिक बुनियाद पर आधारित हैं ! ये हमारे सुखमय जीवन हेतु आवश्यक हैं !
कल्ह जूड़ शीतल भी एक पर्व है । ये सभी लोक पर्व हैं ।
सभी कल्याणकारी !
त सानल जाए सतुआ ! एगो हरियर मिरचाई, कच्चा आम ,प्याज ,नमक ,अचार या चटनी ले लिया जाए ,फिर तो जय हो !
सान के खाइये या घोल के पीयें, मजा ही मजा है । मन तर रही !
लॉक डाउन है, घर ही रहीं !
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©डॉ. शंभु कुमार सिंह
पटना ,14 अप्रैल ,2020
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