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छोटी सी जिंदगी

by Dr Shambhu Kumar Singh

छोटी सी जिंदगी
छोटे छोटे सपने,
आओ अंजुरी में बांध लें
प्रीत अपने अपने !

लंबी लंबी आहें
लंबी लंबी रातें,
याद आती रही तेरी
मीठी मीठी बातें !

बूंद बूंद आँसू
मंद मंद मुस्कान,
आज जिंदगी लग रही
बिलकुल अनजान !

खोया खोया चांद
सहमी सहमी कूक,
रुक रुक बढ़ रही
हृदय की हूक !

व्याकुल आंखें
आतुर होठ,
कोई ताक रही
दरवाजे की ओट !

सननन सननन बह रही
पुरवैया बयार ,
कोई नहीं सुन रही
दिल की पुकार !

नहीं भूल पाओगी
सनम मुझे आप,
जलाता रहेगा तुझे
मेरे प्यार का ताप!

©डॉ. शंभु कुमार सिंह
पटना ,12 जून, 20

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