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जंगल जलेबी

by Dr Shambhu Kumar Singh

जंगल जलेबी उर्फ गंगा इमली

मेरे पूर्णिया वाले गाँव में जंगल जलेबी के बहुत पेड़ हैं। यूं पूर्णिया में इसके पेड़ बहुतायत पाए जाते हैं। पूर्णिया शहर में भी इसके पेड़ देखे जा सकते हैं। इंदिरा गांधी स्टेडियम के सामने इसके कई एक पेड़ हैं तो कला भवन रोड पर भी इसके कई पेड़ देखे जा सकते हैं। हम कभी इसके फल नहीं खाये थे पर जब लोगों को इसके फल खाते देखा तो मैं भी खाया । अच्छा लगा । बिहार में वैशाली जिले या इसके आसपास के जिलों में यह पेड़ नहीं मिलता है पर सीमांचल में काफी मिलता है। यह जंगली पेड़ है और सहजता से लगता है। बीज से तो लगता है ही इसको काट कर तने को लगाएं तो भी पेड़ लग जाता है। इसकी लकड़ी बड़ी मजबूत होती है और किसान भाई इसका हेंगा जरूर बनवाते हैं।

पता नहीं, आपने कभी जंगल जलेबी का नाम सुना है या नहीं ? अगर नहीं तो विस्तार से मैं ही बताता हूँ। यह जंगल जलेबी कोई मिठाई नहीं, बल्कि एक पेड़ है, जिसके फल का आकार जलेबियों जैसा होता है। तो इसी कारण जंगल जलेबी नाम पड़ा ! आमतौर पर इसका पेड़ जंगलों में ही पाया जाता है, मगर गांवों से ताल्लुक रखने वाले लोगों ने इसके फल को जरूर देखा होगा जैसे कि मैं, पूर्णिया में ! जंगल जलेबी में ढेर सारे औषधीय गुण होते हैं और ये बहुत फायदेमंद होता है। बहुत सारे इलाकों में तो इसके फल को खूब खाया जाता है और मार्केट में बेचा भी जाता है। तमाम इलाके ऐसे भी हैं जहां जानकारी न होने के कारण लोग इस फल के औषधीय गुणों का लाभ नहीं उठाते हैं। आमतौर पर ये फल अप्रैल से जून के मौसम में आता है।
जंगल जलेबी या गंगा इमली कच्ची होने पर हरे रंग की होती है और पक जाने पर लाल गुलाबी रंग की होती है। इसके अंदर का गुदा सफेद और लाल गुलाबी होता है।जंगल जलेबी फल के अंदर काले रंग के बीज निकलते हैं। जंगल जलेबी का आकार जलेबी या इमली की तरह होता है। यह फल खाने में खट्टा मीठा होता है। इसमें मुख्यरूप से ये पोषक तत्व मिलते हैं-पोटेशियम,लोहा,फास्फोरस,कैल्शियम,विटामिन सी,मैग्नीशियम,प्रोटीन,वसा,कार्बोहाइड्रेट और राइबोफ्लेविन ।
भारत में जंगल जलेबी के पेड़ कई- कई जगह पाए जाते हैं। यह तमिलनाडु, केरल, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश और दिल्ली में पाया जाता है।
जंगल जलेबी या गंगा जलेबी या किकर (राजस्थान) (वानस्पतिक नाम: Pithecellobium ) एक सपुष्पी पादप है। इसके पेड़ की छाल के काढ़े से पेचिश का इलाज किया जाता है। त्वचा रोगों, मधुमेह और आँख के जलन में भी इसका इस्तेमाल होता है।पत्तियों का रस दर्द निवारक का काम भी करता है और यौन संचारित रोगों में भी कारगर है। इसके पेड़ की लकड़ी का उपयोग इमारती लकड़ी की तरह ही किया जा सकता है।
पेड़ की लम्बाई मध्यम होती है पर इसपे चढ़ना बहुत ही कठिन होता है।इसकी टहनियां काफी घनी होती हैं इसलिए जब भी आपको इसके फल खाने की इच्छा करे तो लग्गी लेकर जाना न भूलें क्योंकि यह अत्यंत कंटीली होती है।
भारत से बाहर इसके पेड़ ब्राजील, पेरू, गुयाना, संयुक्त राज्य अमेरिका, वेनेज़ुएला, क्यूबा, कोलंबिया मेक्सिको, वर्जिन दीप समूह और जमैका आदि में पाये जातें हैं। यह फल मैक्सिको और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों में प्रमुखता से पाया जाता है ।फिलीपींस में यह फल कच्चा खाया जाता है बल्कि वहाँ चौके में भी कई प्रकार के व्यंजन बनाने में इसका उपयोग किया जाता है।
जंगल जलेबी के पेड़ के जड़ से लेकर तना, छाल, पत्तियां, लकड़ी, फल और फूल सभी उपयोग में लाये जाते हैं।तो चलिए जानते है,जंगल जलेबी फल के घरेलू नुस्खें व उपयोग के बारे में।

कई बीमारियों से बचाता है जंगल जलेबी फल

इस की छाल का काढ़ा बनाकर पीने से पेचिश समाप्त हो जाता है। मधुमेह,त्वचा और आंखों की जलन में भी इसका उपयोग किया जाता है। जंगल जलेबी के फल की पत्तियों का प्रयोग दर्द में भी किया जाता है।
1.जंगल जलेबी को डायबिटीज रोगियों के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है। इसके फल में कई एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं जो शरीर को लाभ पहुंचाते हैं। टाइप 2 डायबिटीज रोगियों के लिए जंगल जलेबी के फल और इसके जूस का सेवन करना बहुत लाभप्रद हो सकता है। बहुत सारे वैद्य और पुराने लोग मानते हैं कि डायबिटीज रोगी अगर एक महीने तक रोजाना इस जंगल जलेबी के फल को खाएं, तो उन्हें डायबिटीज रोग से छुटकारा मिल सकता है।
2.Journal of Pharmacognosy and Phytochemistry में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार जंगल जलेबी के फल में कैंसर-रोधी गुण पाए गए हैं। यानी इस फल का सेवन किया जाए तो शरीर में कैंसर कोशिकाओं के बढ़ने की गति रुकती है और अगर किसी व्यक्ति को कैंसर नहीं है, तो उसके होने की संभावना भी कम हो जाती है। क्योंकि इसके फल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स कैंसर कोशिकाओं को पनपने से रोकते हैं।अगर जंगल जलेबी के फल का उपयोग नियमित रूप से किया जाए तो कैंसर से छुटकारा मिलता है। यह फल कैंसर की कोशिकाओं को बढ़ने नहीं देता। जंगल जलेबी के फल में एंटीऑक्सीडेंट,एंटी-इंफ्लेमेटरी के गुण पाए जाते हैं जो कैंसर के खतरे से बचाते हैं।एक वैज्ञानिक रिसर्च में पता चला है कि जंगल जलेबी के वृक्ष के पत्तों से “ब्रेस्ट कैंसर” के सेल मरते हैं। ये कैंसर सेल पर 48 घंटे में ही असर करना शुरू करते हैं।
3.जंगल जलेबी के सेवन से इम्यूनिटी भी बूस्ट होती है। कोरोना वायरस के कारण आजकल इम्यूनिटी की बड़ी चर्चा है। ऐसे में अगर आप गांव से हैं और आपके आसपास जंगल जलेबी का पेड़ है तो आप इसके फल को रोजाना खाएं और परिवार के दूसरे सदस्यों को भी खिलाएं। जंगल जलेबी के खट्टे फल में विटामिन C की मात्रा बहुत ज्यादा होती है, इसलिए ये एक तरह से एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करता है और शरीर के रोगों से लड़ने की क्षमता को बढ़ाता है।
4.आपको कभी हैरानी नहीं होती कि गांवों में लोग इतने मजबूत कैसे होते हैं और इतने काम, भारी बोझ उठाना, पैदल चलना आदि सब कैसे कर लेते हैं? और तो और इस कोरोना संकट में भी बहुत ज्यादा प्रभावित नहीं हुए हैं! दरअसल गांवों के खानपान में ऐसे बहुत सारी औषधीय चीजें अनजाने में ही शामिल होती हैं जो उनके शरीर को मजबूत बनाने का काम करती हैं। इन्हीं में से जंगल जलेबी भी एक फल है। जंगल जलेबी के फल में कैल्शियम और फॉस्फोरस की अधिकता होती है, इसलिए इसके सेवन से हड्डियां और दांत मजबूत होते हैं, साथ ही मांसपेशियां स्वस्थ रहती हैं।
5.जंगल जलेबी के फल के सेवन से आपकी पाचन शक्ति बढ़ती है और पेट स्वस्थ रहता है। इस फल में बहुत सारे औषधीय गुण होते हैं। सबके बारे में एक लेख में बता पाना मुश्किल है। जंगल जलेबी फल को खाने से पेट से संबंधित सारी समस्याएं समाप्त हो जाती है।यह कब्ज, दस्त, गैस और पेट दर्द की समस्या को दूर करता है और इसके साथ ही यह फल पाचन तंत्र को भी मजबूत करता है जिससे हमें पाचन तंत्र से संबंधित कोई समस्या नहीं होती।
6.चर्म रोग में इसके फल का उपयोग किया जाता है। एलर्जी की समस्या में और यदि आपको स्किन की भी समस्या है तो आप जंगल जलेबी के पेड़ की छाल को पीसकर इसका लेप स्किन पर लगा लें। इससे आपको जल्दी राहत मिलेगी। इसलिए हमें सभी पेड़ों के महत्व के बारे में जरूर जानना चाहिए।
7.इसका फल गुर्दे( किडनी )के इंफेक्शन को दूर करता है। यह फल धीरे-धीरे फायदा करता है। इसके लिए आप रोज एक गिलास जंगल जलेबी के फल का पानी पी सकते हैं।
8.जंगल जलेबी के फल में फॉस्फोरस और कैल्शियम की मात्रा अधिक होने के कारण इसके सेवन से हमारे शरीर की हड्डियां और दांत मजबूत होते हैं और साथ ही मांसपेशियां स्वस्थ रहती हैं। जिससे हम स्वस्थ रहते हैं।

इस तरह हम देखते हैं कि यह जंगल जलेबी राम भरोसे हलुवाई की जलेबी से ज्यादा टेस्टी न हो पर उपयोगी जरूर है। तो देरी क्यों करना है ,लीजिये एक लग्गी और निकल पड़िये! खुद खाइये और दूसरों को भी खिलाइये !

वैसे तो जंगल जलेबी फल का कोई नुकसान नहीं पर
हमारी सलाह है कि किसी भी फल की मात्रा का अधिक सेवन ना करें।

(किसी भी फल को नुस्खे के रूप में उपयोग करने के लिए नजदीक डॉक्टर या विशेषज्ञ से सम्पर्क अवश्य करें।यह लेख चिकित्सकीय आधार पर नहीं लिखा गया है वरन एक सूचनापरक लेख है।)

© डॉ. शंभु कुमार सिंह
7 जून , 21
पटना
प्रकृति मित्र
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