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अलसी पर चर्चा

by Dr Shambhu Kumar Singh

तीसी की तीमारदारी

तीसी को अलसी भी कहा जाता है। पर हमलोग तो बचपन से इसे तीसी ही कहते आये हैं। वैशाली के गांवों में खेलते वक्त हमलोग तीसी पर एक गीत भी गाते थे। कबड्डी खेलते वक़्त बोलते थे, “खेल कबड्डी अत्ता, बेंग बरियत्ता , तीसी तेल ,बबूर के छत्ता….., छत्ता ऊपर तीन कमानी ,कबड्डी खेले बड़ी जवानी!”
तो इस गीत में तीसी तेल का क्यों गुणगान है, वह अब समझ में आ रहा है! तीसी का न केवल तेल वरन उसका भुना हुआ चूरन, तिलौड़ी आदि भी हम लोग बचपन में खाते थे। दादी केलिए भुनी हुई तीसी को पीस कर रखा जाता था जिसे वह नमक मिर्च मिला कर खाती थी। थोड़ा पानी डाल इसे घोल भी देती थी। कद्दू की सब्जी में भी इस तीसी के चूरन को मिला खाते थे। तीसी की तिलौड़ी भी बनती थी।
हमारे गांव में भुने तीसी को महुआ के साथ कूट कर मिला कर एक देसी व्यंजन बनता था जिसे हमलोग लट्टा कहते थे। आज कल मेरी श्रीमती जी भी अलसी उर्फ तीसी के सेवन पर ज्यादा सक्रिय हैं । इस सक्रियता का कारण उनकी नेट से उपलब्ध तीसी पर जानकारी है। मैं देख भी रहा हूँ कि लोग जो स्वास्थ्य के प्रति ज्यादा जागरूक हैं वो अलसी के सेवन को वरीयता दे रहे हैं।
अलसी सच में स्वाद एवं स्वास्थ्य की खान है। इसके सेवन से कई एक बीमारियों से बचा जा सकता है। पहले ग्रामीण इलाकों में खासकर हमारे वैशाली जिले में तीसी के तेल की पूड़ियाँ भोजभात में परोस दी जाती थी जिसको शायद लोग पसंद नहीं करते हों पर यह आम उपयोग में खूब था। चाहे अनचाहे खाने का परिणाम यह हुआ कि ग्रामीण इलाकों के लोगों का स्वास्थ्य अन्य लोगों की तुलना में उन्नत होता था।
अलसी एन्टी ऑक्सीडेंट का एक प्रमुख स्रोत है। इसमें विटामिन, मिनरल्स तथा अन्य पोषक तत्व काफी मिलते हैं।

अलसी के यह हैं बेहतरीन फायदें

1.भूरे-काले रंग के यह छोटे छोटे बीज, हृदय रोगों से आपकी रक्षा करते हैं। इसमें उपस्थित घुलनशील फाइबर्स, प्राकृतिक रूप से आपके शरीर में कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करने का काम करता है। इससे हृदय की धमनियों में जमा कोलेस्ट्रॉल घटने लगता है, और रक्त प्रवाह बेहतर होता है, नतीजतन हार्ट अटैक की संभावना नहीं के बराबर होती है ।
2.अलसी में ओमेगा-3 भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो रक्त प्रवाह को बेहतर कर, खून के जमने या थक्का बनने से रोकता है, जो हार्ट-अटैक का कारण बनता है। यह रक्त में मौजूद कोलेस्ट्रॉल को कम करने में भी सहायक है।

  1. यह शरीर के अतिरिक्त वसा को भी कम करती है, जिसे आपका वजन कम होने में सहायता मिलती है।
  2. अलसी में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट्स और फाइटोकैमिकल्स, बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करती है, जिससे त्वचा पर झुर्रियां नहीं होती और कसाव बना रहता है। इससे त्वचा स्वस्थ व चमकदार बनती है।
  3. अलसी में अल्फा लाइनोइक एसिड पाया जाता है, जो ऑथ्राईटिस, अस्थमा, डाइबिटीज और कैंसर से लड़ने में मदद करता है। खास तौर से कोलोन कैंसर से लड़ने में यह सहायक होता है।
  4. सीमित मात्रा में अलसी का सेवन, खून में शर्करा के स्तर को नियंत्रित करता है। इससे शरीर के आंतरिक भाग स्वस्थ रहते हैं, और बेहतर कार्य करते हैं।
  5. इसमें उपस्थित लाइगन नामक तत्व, आंतों में सक्रिय होकर, ऐसे तत्व का निर्माण करता है, जो फीमेल हार्मोन्स के संतुलन को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
    8.अलसी के तेल की मालिश से शरीर के अंग स्वस्थ होते हैं, और बेहतर तरीके से कार्य करते हैं। इस तेल की मसाज से चेहरे की त्वचा कांतिमय हो जाती है।
  6. शाकाहारी लोगों के लिए अलसी, ओमेगा-3 का बेहतर विकल्प है, क्योंकि अब तक मछली को ओमेगा-3 का अच्छा स्त्रोत माना जाता था,जिसका सेवन नॉन-वेजिटेरियन लोग ही कर पाते हैं।
  7. प्रतिदिन सुबह शाम एक चम्मच अलसी का सेवन आपको पूरी तरह से स्वस्थ रखने में सहायक होता है, इसे पीसकर पानी के साथ भी लिया जा सकता है । अलसी को नियमित दिनचर्या में शामिल कर आप कई तरह की बीमारियों से अपनी रक्षा कर सकते हैं, साथ ही आपको डॉक्टर के पास जाने की जरूरत भी नहीं पड़ेगी।

पर अलसी खाने में करें यह सावधानियां भी

  1. लूज मोशंस
    अगर अलसी ज्यादा मात्रा में खाई जाए तो लूज़-मोशन हो सकते हैं । अगर इन्हें सही मात्रा में खाया जाए तो कब्ज से राहत मिलती है और सही तरह पेट की सफाई भी हो जाती है । हालांकि, जरूरत से ज्यादा खाने पर आपको बार-बार वॉशरूम जाना पड़ेगा। यही नहीं डायरिया की आशंका भी रहती है। ऐसे लोग जो पहले से ही इन समस्याओं से जूझ रहे हैं उन्हें किसी भी हाल में अलसी का उपयोग नहीं करना चाहिए।
  2. आंतों में ब्लॉकेज
    विशेषज्ञों की मानें तो पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ लिए बिना जरूरत से ज्यादा अलसी खाने से आंतों में ब्लॉकेज आ सकता है। जिन्हें पहले से ही इस तरह की शिकायत रही है उन्हें अलसी के बीज नहीं खाने चाहिए। खासतौर से Scleroderma के मरीजों को नहीं खाना चाहिए क्योंकि इससे भयानक कब्ज हो सकता है। हालांकि अलसी के तेल का इस्तेमाल Scleroderma के इलाज के लिए किया जाता है।
  3. एलर्जी
    ज्यादा अलसी खाने वाले कुछ लोग एलर्जी की शिकायत कर चुके हैं। ज्यादा अलसी खाने से सांस लेने में रुकावट, लो ब्लड प्रेशर और तीव्रग्राहिता जैसे एलर्जिक रिएक्शन हो सकते हैं। यही नहीं घबराहट, पेट में दर्द और उल्टी की शिकायत भी हो सकती है।
  4. जो महिलाएं प्रेग्नेंट होना चाहती हैं
    अलसी के बीज एस्ट्रोजन की तरह काम करते हैं और जो महिलाएं रोजाना अलसी के बीज खाती हैं उनके पीरियड साइकिल में बदलाव आ सकता है। इसके अलावा जो महिलाएं हार्मोनल दिक्कतों जैसे कि पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम, यूटरिन फायब्रॉयड्स, यूटरिन कैंसर और ओवरी कैंसर से जूझ रही हैं उन्हें अलसी को अपनी डाइट में शामिल करते वक्त सावधानी बरतनी चाहिए। ज्यादा मात्रा में अलसी खाने से इन दिक्कतों की वजह से बांझपन का खतरा बढ़ सकता है।
  5. प्रेग्नेंसी के दौरान असुरक्षित
    चूंकि अलसी के बीजों में एस्ट्रोजन जैसे गुण होते हैं इसलिए इससे पीरियड्स आ सकते हैं। प्रेग्नेंट महिलाओं को अलसी के बीज खाने की सलाह नहीं दी जाती है। क्योंकि इन्हें खाने से पीरियड्स आ सकते हैं जो होने वाले बच्चे और मां दोनों को नुकसान पहुंचाने के लिए काफी हैं।
  6. दवाइयों पर रिएक्शन
    फाइबर युक्त अलसी पाचन तंत्र को ब्लॉक कर कुछ दवाइयों और सप्लीमेंट्स को अवशोषित नहीं होने देती है।अगर आप इस तरह की दवाई ले रहे हैं तो अलसी न खाएं। यही नहीं अलसी के बीज खून को पतला करने वाली दवाइयों और ब्लड शुगर की दवाइयों को भी प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में आपको यही सलाह दी जाती है कि अलसी के अपनी डाइट में शमिल करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें। हालांकि सही मात्रा में अलसी खाने से ब्लड शुगर लेवल कम होता है, ब्लड कोलेस्ट्रॉल सही रहता है और ऑटोइम्यून डिस्ऑर्डर को ठीक करने में मदद मिलती है क्योंकि अलसी के बीज फाइबर, मिनरल्स, ओमेगा 3 फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट गुणों से भरपूर होते हैं।
    आप अलसी के कई एक व्यंजन भी बना खा सकते हैं। मेरे घर में अलसी के चूरन को चीनी के साथ मिला पूड़ी में भर कर भी बनाया जाता है। सीधे भून कर पीस कर भी खा सकते हैं। तिलौड़ी आदि तो है ही। इसे अन्य सब्जियों में भी मिला कर खा सकते हैं।
    घाव तथा बलतोड़ में तीसी का प्रयोग उपयोगी होता है। मां बोलती थी, पहले लोग तीसी के लेप को बालों को सेट करने में प्रयोग करते थे।
    तीसी एक आम फसल है। इसे गांव में फसलों की किनारी के रूप में लोग व्यवहार करते हैं हालांकि अब तीसी की खेती कुछ कम हो गयी है। ऑर्गेनिक तीसी की फसल की बाजार में अभी खूब मांग है। बड़े बड़े मॉल में इसके आकर्षक पैकिंग उपलब्ध दिख रहे हैं। एक जमाने का आम भोजन तीसी अभी विशेष भोजन का अंग बनता जा रहा है। समय का खेल है। तीसी हमारे जीवन से जाने वाला नहीं है!
    तो आइए, भोजन में तीसी यानी अलसी को वैज्ञानिक रूप से शामिल करें और एक स्वस्थ भोजन शैली को अपनाएं तथा स्वस्थ रहें।
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©डॉ. शंभु कुमार सिंह
28 जनवरी,21
पटना
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